आप एक सपना था...
खुली आखों से देखा एक अबूझ सा सपना...
सात समंदर पार से आने वाली एक परी
जो बरसों बरस, मेरी साँसों मैं जीवित रही...
मेरी भावनाओं मैं व्यक्त होती रही ...
और नज़रों के सामने रही...
न होते हुए भी ५ साल तक सामने रही....
बातें करते रहे, हँसते रहे, रोते रहे.
खुश भी रहे, दुखी भी रहे...
शायद कुछ ख़ास नहीं था.... हमारी लव स्टोरी में...
वायदे किये, कसमें खाई....
अब के मजबूरी है जान...
आओगे तो कभी मत जाना
अगर जाना पड़े तो जाना और वापिस आ जाना....
और आपने स्वीकृति दे दी हमें...
और लगा मानो सब कुछ पा लिया हो ...
जानते थे दूरियां, फासले बड़ा देती है...
कुछ भी न होते हुए भी , गलतफहमियां दे देती हैं....
फिर एक दिन सुन्दर सपना टूटा...
और आप चले गए...
बहुत रोया था उस दिन में...
आँखों से गिरते हुए नमकीन पानी से शर्ट सराबोर थी...
तकलीफ थी कुछ दिनों के लिए ही गए हो, लेकिन क्यूँ गए हो ...
बिना गए नहीं चल सकता था क्या....
फिर आप वहीँ के हो के रह गए...
कभी इस लिए, कभी उस लिए...
आप का आना न हो सका
दिन हफ्ते, महीने और कई मौसम चले गए...
लेकिन आप न आ सके...
शायद वो स्वीकृति अप्रासंगिक हो गई थी...
हमारी चाहतों पर आपकी इच्छाएं भारी पड़ी ...
और आप आ न सके...
एक बरस होने को है...
अब तो मेरे प्यार को भी शक की नज़र से देखते हो आप....
अब तो ये सच भी तडपता सा है कि मैं आप से मोहब्बत करता हूँ.
क्या करूँ कि तुम्हे यकीन हो जाए,















